Tuesday, April 20, 2010

मन की कविता ही क्यूँ

इस ब्लॉग का नाम मैंने मन की कविता इसलिए रखा है क्योंकि यदि सूक्ष्म अन्वेषण किया जाए तो आज कविता मन या दिल या यूँ कहें कि स्वान्तः सुखाये के लिए ही लिखी जा रही है कोई प्रकाशक कविता छापना नहीं चाहते

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