Tuesday, April 20, 2010

मन की कविता ही क्यूँ

इस ब्लॉग का नाम मैंने मन की कविता इसलिए रखा है क्योंकि यदि सूक्ष्म अन्वेषण किया जाए तो आज कविता मन या दिल या यूँ कहें कि स्वान्तः सुखाये के लिए ही लिखी जा रही है कोई प्रकाशक कविता छापना नहीं चाहते

Monday, April 19, 2010

तुम्हारा आना

कभी वक़्त मिले तो दुबारा आना मेरे पास और देखना कि
पहली बार आये तुम्हारे कदमोँ को मैनेँ कैसे सम्भाल कर रखा है
बिस्तर की सलवटोँ से लेकर काफी के जूठे मग में आज भी पडे हैं
तुम्‍हारे कदमों के निशान.