Saturday, August 11, 2012

नया चित्र / इसी बेनियाज़ी में

1.नया चित्र मैं तुम्हारा एक बहुत सुंदर चित्र बनाना चाहती थी लेकिन उससे पहले ही वक्त ने मेरे हाथ बांध दिये और काट दिये मेरे पंख अब मेरे सामने लेकर खड़ा है एक सुनहरा पिंजड़ा धीरे-से वह मुझे इस पिंजड़े में खींच लेता है पलक झपकते ही मैं पिंजड़े में और पिजड़ा जलती हुई ज्वाला के बीचोंबीच लेकिन यह पिंजड़ा और उसके चारों ओर की आग मुझे डरा नहीं पाती न ही जला पाती है मैं और ज्यादा निर्भीक, दुस्साहसी और तपकर खांटी सोने की तरह दुनिया के सामने आ रही हूं अपनी एक नयी दुनिया बनाने के लिए मैं निरंतर आग से खेल रही हूं अपनी इस भावी नयी दुनिया में मैं तुम्हें देखती हूं दूर... कहीं दूर... कहीं बहुत दूर..... तुम्हें छूने के लिए हाथ बढ़ाती हूं लेकिन छू नहीं पा रही मेरे हाथ तुम्हें छू पाने में असमर्थ हैं मेरे मुंह से लाल लपटें उठ रही होती हैं अब पिंजड़े की सलाखें पिघलने लगी हैं मैंने भस्म बनकर आकाश में एक पवित्र स्थान प्राप्त कर लिया है लेकिन अब भी वक्त का मन नहीं भरा वक्त मुझे कोहरे और धुएं से भरकर इसी रूप में धरती के चारों ओर के वातावरण में बिखरा देता है लेकिन अब मैंने ठान लिया है वक्त का यह उत्पीड़न लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करूंगी वक्त से लोहा लूंगी ये बुरे बादल छंट जायेंगे नयी रोशनी बादलों को चीरकर बाहर आयेगी सूरज की किरणें और प्रखर हो जायेंगी फिर बारिश से दिन धुल जायेगा तुम मेरे पास होगे और मैं...मैं नयी रोशनी में तुम्हारा नया चित्र बनाऊंगी। 2.इसी बेनियाज़ी में एक इतना बड़ा ब्लैकहोल था पहले मेरे दिल में कि दुनिया की सारी गंदगी चली आती थी बेधड़क मेरे दिल में, मेरे जेहन में और हट गयी थी ओजोन की वह परत जो रोकती थी इन अल्ट्रावायलेट गंदगियों को मेरे दिल में, मेरे जेहन में आने से पर अब... अब मैंने कोशिश की है कि एक सेफ्टीवॉल्व लगा लूं दिल में कुछ-कुछ एक्वागार्ड की तरह का और कामयाब हो गयी हूं इसमें भी अब मेरे दिल में छनकर आते हो तुम आसमान से टपकती स्वच्छ बारिश की बूंद बनकर एकदम क्रिस्टल क्लियर बन जाते हो मिनरल वाटर से भी शुद्ध और साफ एकदम पारदर्शी अब छनकर आती है तुम्हारे नजरों की पाकीजा रोशनी और मैं अपने चेहरे पर रख लेती हूं तुम्हारी आंखें अपने होठों पर रख लेती हूं तुम्हारे होंठ अपने पूरे वजूद में समेट लेती हूं तुम्हारी उंगलियों के पोरों के स्पर्श में बसी जिंदगी और छानकर बाहर फेंक देता है यह सेफ्टीवॉल्व अतीत की बुरी यादों को तुम फैल जाते हो मेरे चेहरे पर ओस की नन्ही-नन्ही बूंदों की तरह और बंद कर लेना चाहते हो मेरी बेनियाजी को एक बोतल में ताकि मुझे और निखार कर और संवार कर बिखेर दो पूरे आसमान में और मैं बरस पड़ूं एक तराशी हुई सलीकेमंद बेनियाजी के साथ भिंगो दूं पूरी धरती को तुम्हारे पूरे वजूद कोअपनी इसी बेनियाजी में। © मंजरी श्रीवास्तव